September 19, 2018

मगध पर मगजमारी, डैमेज कंट्रोल में जुटे लालू

bihar-polls-lalu-prasad-dares-bjp-to-declare-cm-candidateपटना। मगध के राजाओं ने कभी पूरे देश पर शासन किया था। इस इलाके पर जिसने कब्जा किया, बिहार में उसकी सरकार बन गई। राजद प्रमुख लालू प्रसाद की नजरों में इस बार मगध प्रमंडल की 26 सीटें चढ़ गई हैं।

शायद यही वजह है कि पटना प्रमंडल की बैठक के बाद लालू ने मगध को ही तरजीह दी है। शुक्रवार को लालू ने मगध के अपने मनसबदारों की बैठक बुलाई है, जिसमें एक-एक सीट पर माथापच्ची होगी।

मगध प्रमंडल में कभी राजद की तूती बोलती थी। 2000 के चुनाव में राजद ने यहां की 18 सीटों पर कब्जा किया था, जो दूसरे किसी भी प्रमंडल से अधिक थी। इसके पहले 1995 के चुनाव में भी लालू के नेतृत्व वाले जनता दल को 50 फीसदी से ज्यादा सीटें मिली थीं। 26 में से 14 सीटें लालू की झोली में गई थी।

मगर इसी मगध में आज राजद का सबसे बुरा हाल है। महज एक सीट पर राजद के सुरेंद्र यादव काबिज हैं। हालांकि लालू के लिए राहत की बात सिर्फ इतनी हो सकती है कि इस प्रमंडल में सर्वाधिक 16 सीटों पर अभी इनके नए सहयोगी जदयू का कब्जा है। आठ पर भाजपा तथा एक सीट निर्दलीय के हिस्से में है।

लालू प्रसाद को अहसास है कि बिहार की सत्ता में वापसी के लिए मगध पर कब्जा जरूरी है। यही कारण है कि राजद प्रमुख ने मगध में पैर जमाने की कोशिश तेज कर दी है। जदयू-राजद में गठबंधन के बाद इस क्षेत्र का राजनीतिक समीकरण बदला है। ऐसे में अब लालू को हवा बदलने का भी प्रयास करना पड़ेगा।

किसी भी पार्टी की तुलना में राजद का नेटवर्क यहां आज भी मजबूत है। लेकिन वर्षों से किसी ने सुध नहीं ली है। लालू के प्रयास तभी रंग ला सकते हैं जब उनके सुस्त समर्थकों में नई ऊर्जा का संचार कर दिया जाए और समय रहते रास्ते के अवरोधों से निपट लिया जाए।

सबसे पहली मुसीबत यह कि अपने नए सहयोगी जदयू से अपनी पुरानी सीटें लालू किस तरह हासिल करेंगे। पिछले चुनाव में भाजपा और जदयू ने मिलकर 26 में 24 सीटों पर कब्जा कर लिया था। जदयू के हिस्से में अभी 16 सीटें हैं। इनमें से अधिकांश सीटों पर राजद के प्रत्याशियों ने ही जदयू को कड़ी टक्कर दी थी। सवाल है कि जीती हुई सीटें राजद को जदयू कैसे दे देगा?

अगर किसी तरह लालू अधिक से अधिक सीटें लेने में कामयाब भी हो गए तो दूसरी चुनौती अगड़े मतदाताओं को गोलबंद होने से रोकने और अपने वोट बैंक को बिखरने से बचाने की होगी। अबकी सारा राजनीतिक समीकरण बदला-बदला नजर आएगा। गांवों में अगड़ी जातियों के वोटों का बिखराव जितना ज्यादा होगा, उतना ही राजद और जदयू की सफलता का प्रतिशत बढ़ सकता है।

लालू और नीतीश के लिए तीसरी चुनौती जीतनराम मांझी पेश करेंगे। मांझी खुद भी मगध क्षेत्र के मखदुमपुर सीट से विधायक हैं। इनकी जाति के वोटों की संख्या भी ठीकठाक है। जगदीश शर्मा के पुत्र घोसी के विधायक राहुल शर्मा और टिकारी के विधायक अनिल कुमार भी मांझी को बैकअप दे रहे हैं। ऐसे में मांझी का नया अवतार राजद-जदयू गठबंधन को कम परेशान नहीं करेगा।

चौथे मोर्चे पर लालू को अंदरुनी चुनौती से भी निपटना होगा। राजद के कद्दावर नेता और बेलागंज विधायक सुरेंद्र यादव के अपनी ही पार्टी के प्रदेश प्रधान महासचिव मुंद्रिका सिंह यादव से राजनीतिक रिश्ते अच्छे नहीं हैं।

लोकसभा चुनाव के दौरान मुंद्रिका भी जहानाबाद से राजद से टिकट चाह रहे थे, लेकिन बाजी मार ले गए थे सुरेंद्र यादव। बाद में हार का ठीकरा सुरेंद्र ने मुंद्रिका पर ही फोड़ा था और लालू प्रसाद तक से शिकायत की थी।

कहा तो यह भी जाता है कि मुंद्रिका को जब पार्टी में ऊंचा ओहदा दिया जाने लगा तो सुरेंद्र यादव ने एतराज भी जताया था। ऐसे में लालू के सामने दोनों नेताओं की कुंडली मिलाना जरूरी होगा, ताकि पार्टी के प्रदर्शन पर असर न पड़े।

मगध में कुल जिले

गया, जहानाबाद, औरंगाबाद और नवादा

कुल सीटें – 26

राजद की रफ्तार

1990 : 5

1995: 14

2000 : 18

2005 : 8

2010 : 01

लालू आज करेंगे मगध की बैठक

राजद के प्रधान महासचिव मुंद्रिका सिंह यादव ने कहा है कि 19 जून को दोपहर दो बजे मगध प्रमंडल की बैठक पटना स्थित प्रदेश राजद कार्यालय में होगी। इसमें मगध प्रमंडल के सभी राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, पिछले लोकसभा एवं विधानसभा के प्रत्याशी, जिलाध्यक्ष, प्रकोष्ठ अध्यक्ष, प्रखंड अध्यक्ष, प्रवक्ता एवं वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया गया है। मुंद्रिका ने बताया कि बैठक को राजद प्रमुख लालू प्रसाद संबोधित करेंगे।

Courtesy: Jagran

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